Friday, July 27, 2012

..... क्या खूब कहा कुदरत ने

.. क्या खूब कहा कुदरत ने
.. आज सजा देंगे फुरसत मे
.. कोई देखे - नादेखे तुझे
.. तेरी रजा देंगे जन्नत मे
.. नाचीज कि अर्जी थी ऐसी
.. रंग आये गुलशन मे
.. फिक्र तू न कर बंदे
.. नूर नजर आये इतने
.. हमरे चिलमन मे
.. झटक कर देख ले आज भी दामन
.. कलिया हि बिखरेंगी चारो ओर
.. खुश्बुका माहोल होगा, और
.. नजर होगी मेहेर मे.
.. नही जानता तू कि,
.. क्या है तेरी ताकत
.. वक्त का सिर्फ ताकाजा है
.. वर्ना हम भी होते बुन्दो मे

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